पाठ 2: “चींटी”
संदर्भ और प्रसंग
संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक (वीणा) के पाठ 2 “चींटी” नामक आनंदमयी कविता से ली गई हैं। इसके रचयिता प्रसिद्ध बाल-कवि श्री प्रकाश मनु जी हैं।
प्रसंग: इस कविता में कवि ने एक छोटी-सी चींटी की दिनचर्या और उसके स्वभाव का वर्णन किया है। कवि ने बताया है कि कैसे एक नन्ही चींटी अपने छोटे शरीर के बावजूद अपनी मेहनत, लगन और बड़े इरादों से हमें जीवन की बहुत बड़ी सीख दे जाती है।
पद्यांशों की व्याख्या
पद्यांश 1:हर पल चलती जाती चींटी, श्रम का राग सुनाती चींटी। कड़ी धूप हो या हो वर्षा, दाना चुनकर लाती चींटी।
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व्याख्या: कवि कहते हैं कि चींटी कभी भी खाली नहीं बैठती, वह हर पल निरंतर चलती ही रहती है। वह लगातार काम करके हमें मेहनत (श्रम) का मधुर गीत (राग) सुनाती है। चाहे चिलचिलाती तेज़ धूप हो या भयंकर बारिश हो रही हो, चींटी मौसम की परवाह किए बिना अपने लिए जगह-जगह से भोजन (दाना) ढूँढ़कर लाती है।
पद्यांश 2: सचमुच कैसी कलाकार है, घर को खूब सजाती चींटी।छोटा तन, पर बड़े इरादे, नहीं कभी घबराती चींटी।
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व्याख्या: कवि चींटी की तारीफ करते हुए कहते हैं कि चींटी सच में एक बहुत अच्छी कलाकार होती है। वह अपने छोटे से घर (बिल) को बहुत सुंदर तरीके से बनाती और सजाती है। चींटी का शरीर (तन) भले ही बहुत छोटा होता है, लेकिन उसके मन के लक्ष्य और इरादे बहुत बड़े और मजबूत होते हैं। वह मुश्किलों और मुसीबतों से कभी भी नहीं घबराती है।
पद्यांश 3:नन्हे-नन्हे पैर बढ़ाकर, पर्वत पर चढ़ जाती चींटी।काम बड़े करके दिखलाती, जहाँ कहीं अड़ जाती चींटी।
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व्याख्या: चींटी अपने छोटे-छोटे कदमों को आगे बढ़ाते हुए ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों पर भी आसानी से चढ़ जाती है। अगर वह किसी काम को पूरा करने की ठान ले (अर्थात अड़ जाए), तो वह अपनी जिद और लगन से बड़े-से-बड़ा और कठिन काम भी पूरा करके दिखा देती है।
पद्यांश 4: मेहनत ही पूजा है प्रभु की,हमको यही सिखाती चींटी।
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व्याख्या: कविता के अंत में कवि कहते हैं कि चींटी अपने आचरण से हमें जीवन की सबसे बड़ी बात सिखाती है कि सच्ची लगन से की गई ‘मेहनत’ ही भगवान की सबसे बड़ी पूजा है। जो व्यक्ति चींटी की तरह परिश्रम करता है, ईश्वर उसी से हमेशा प्रसन्न रहते हैं।
कविता से मिलने वाली शिक्षा (Moral):
चींटी की इस कविता से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी अपने आकार या उम्र को अपनी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। अगर हमारे इरादे पक्के हों और हम निरंतर मेहनत करें, तो हम जीवन में कोई भी बड़ा लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।
1. बातचीत के लिए
प्रश्न 1: आपने अपने आस-पास, घर और विद्यालय में कौन-कौन से जीव-जंतु देखे हैं?
उत्तर: हमने अपने आस-पास, घर और विद्यालय में कुत्ता, बिल्ली, चींटी, चिड़िया, गाय, गिलहरी, तितली, मक्खी और छिपकली जैसे जीव-जंतु देखे हैं।
प्रश्न 2: आपने सबसे छोटा कौन-सा कीट देखा और कहाँ देखा है?
उत्तर: हमने सबसे छोटा कीट चींटी (या मकोड़ा) देखा है, जिसे हमने अपने घर के फ़र्श और दीवार पर देखा है।
प्रश्न 3: आपने चींटी के अतिरिक्त और कौन-कौन से श्रम करने वाले जीव देखे हैं?
उत्तर: चींटी के अलावा हमने मधुमक्खी, बया (घोंसला बनाने वाली चिड़िया), और मकड़ी को लगातार मेहनत करते हुए देखा है।
प्रश्न 4: नन्ही चींटी के बारे में अपना कोई अनुभव बताइए।
उत्तर: एक बार मेरे हाथ से थोड़ी सी चीनी ज़मीन पर गिर गई थी। कुछ ही देर में बहुत सारी चींटियाँ एक-दूसरे के पीछे एक सीधी कतार (लाइन) में आकर चीनी के दानों को उठाकर अपने बिल की ओर ले जाने लगीं।
2. कविता से आगे
प्रश्न 1: नीचे कुछ वस्तुओं के चित्र बने हैं। बताइए, चींटियाँ किसे खाना चाहेंगी? उस पर 😄 का चिह्न बनाइए –
| वस्तु का नाम | चींटी खाएगी या नहीं? | निशान |
| लड्डू | हाँ (मीठा पसंद करती है) | 😄 |
| करेला | नहीं (कड़वा होता है) | |
| गेहूँ के दाने | हाँ (अनाज के दाने जमा करती है) | 😄 |
| चीनी | हाँ (मीठा सबसे ज़्यादा पसंद है) | 😄 |
| शहद | हाँ (मीठा और चिपचिपा रस पसंद है) | 😄 |
| सूखी पत्तियाँ | नहीं (चींटी पत्तियों को भोजन के रूप में नहीं खाती) |
प्रश्न 2: निम्नलिखित पंक्तियों को पूरा कीजिए –
(क) घर को ………खूब सजाती चींटी।
(ख) पर्वत पर ……चढ़ जाती चींटी।
(ग) दाना चुनकर…………लाती चींटी।
(घ) श्रम का राग …………सुनाती चींटी।
प्रश्न 3: कविता के अनुसार चींटी हमको क्या-क्या करना सिखाती है? लिखकर बताइए –
3. भाषा की बात
प्रश्न 1: कविता में चींटी को क्या-क्या कहा गया है –
उत्तर:
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कलाकार (घर को सजाने के कारण)
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मेहनती / श्रम करने वाली (श्रम का राग सुनाने वाली)
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बड़े इरादों वाली (छोटे तन में बड़े इरादे)
- कभी न घबराने वाली
प्रश्न 2: कितनी बार आई चींटी?
‘चींटी’ कविता में ‘चींटी’ शब्द कितनी बार आया है? इन्हें गिनिए और उतनी चींटियाँ बनाकर पंक्ति को पूरा कीजिए –
उत्तर: कविता में ‘चींटी’ शब्द कुल 8 बार आया है। 🐜 🐜 🐜 🐜 🐜 🐜 🐜 🐜
प्रश्न 3: आइए, ‘चींटी’ कविता को आगे बढ़ाते हैं –
प्रश्न 4: शब्दों की तुकबंदी (समान लय वाले शब्द) –
| शब्द | तुकबंदी वाला शब्द |
| दाना |
गाना / आना |
| कड़ी |
अड़ी / बढ़ी |
| राग
धूप |
भाग / जाग
रूप |
चींटी से भेंट
आपके घर के कई कोनों में चींटी आती-जाती है। एक दिन वह आपको रोककर आपसे कुछ कहती है। आपके और उसके बीच क्या-क्या बातें हुई होंगी, लिखिए –
आप: नमस्ते चींटी ! आज आप अकेली आई हैं?
चींटी: नहीं, मेरे बाकी साथी पीछे आ रहे हैं। मैं रास्ते में दाना खोजने आगे आई हूँ।
आप: आप दिन भर इतनी भाग-दौड़ और मेहनत क्यों करती हैं?
चींटी: हम बारिश के दिनों के लिए भोजन जमा कर रहे हैं, ताकि बाद में हमें भूखा न रहना पड़े।
4. बूझो तो जानें (पढ़ने के लिए / पहेली)
चींटी और हाथी की छुपन-छुपाई :चींटी और हाथी छुपन-छुपाई खेल रहे हैं। चींटी को एकदम पता चल जाता है कि हाथी कहाँ छुपा है, क्योंकि हाथी का शरीर बड़ा है ना!
प्रश्न: जब चींटी एक मंदिर के भीतर छिपती है तो हाथी भी उसे एकदम ढूँढ़ लेता है। बताइए, हाथी को कैसे पता चला कि चींटी मंदिर में छिपी है?
उत्तर: क्योंकि चींटी ने मंदिर के बाहर अपनी चप्पलें (चप्पल) उतारी हुई थीं!


