NCERT CLASS 3 VEENA LESSON 1 SOLUTIONS

  इकाई एक – हमारा पर्यावरण

पाठ 1 “सीखो”

 

संदर्भ और प्रसंग 

 

प्रस्तुत कविता हमारी हिंदी की पाठ्यपुस्तक (वीणा) के ‘इकाई एक – हमारा पर्यावरण’ के अंतर्गत दिए गए पाठ 1 “सीखो” से ली गई है। इसके रचयिता श्रीनाथ सिंह जी हैं। इस कविता में कवि ने हमें प्रकृति की विभिन्न वस्तुओं (जैसे- फूल, पेड़, हवा, सूरज, पृथ्वी आदि) से अच्छे गुण और जीवन-मूल्य अपनाने की प्रेरणा दी है।

पद्यांशों की व्याख्या

 

पद्यांश 1:फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना।      तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना।
  • व्याख्या: कवि कहते हैं कि हमें फूलों से हमेशा मुस्कुराना (हँसना) और प्रसन्न रहना सीखना चाहिए। भौंरों से हमें हमेशा खुशी से गुनगुनाना (गाना) सीखना चाहिए। जिस प्रकार पेड़ों (तरु) की डालियाँ फलों से लदकर झुक जाती हैं, उसी प्रकार हमें भी उन झुकी हुई डालियों से नम्रता अपनाना और दूसरों के सामने आदर से सिर झुकाना (सम्मान करना) सीखना चाहिए।

पद्यांश 2:सीख हवा के झोंकों से लो, कोमल भाव बहाना।     दूध तथा पानी से सीखो, मिलना और मिलाना।
  • व्याख्या: हमें बहती हुई हवा के झोंकों से यह सीखना चाहिए कि सबके मन में मधुर और कोमल भावनाएँ कैसे फैलाई जाएँ। जिस तरह दूध और पानी आपस में मिलकर एक हो जाते हैं और उनमें कोई भेद नहीं रहता, उसी तरह हमें भी सबसे मिल-जुलकर रहना और प्रेम-भाव से दूसरों को अपनाना सीखना चाहिए

पद्यांश 3:सूरज की किरणों से सीखो, जगना और जगाना।   लता और पेड़ों से सीखो, सबको गले लगाना।
  • व्याख्या: सूरज की किरणें हमें सिखाती हैं कि हमें रोज़ समय पर उठना चाहिए और अपने कामों में लगना चाहिए, साथ ही दूसरों को भी आलस्य त्याग कर काम करने के लिए प्रेरित (जगाना) करना चाहिए। बेल (लता) जिस तरह पेड़ों से लिपटी रहती है, उनसे हमें यह सीखना चाहिए कि बिना किसी भेदभाव के सभी से प्रेम करें और सबको गले लगाएँ

पद्यांश 4:दीपक से सीखो जितना, हो सके अँधेरा हरना।   पृथ्वी से सीखो प्राणी की, सच्ची सेवा करना।
  • व्याख्या: कवि कहते हैं कि एक दीये (दीपक) से हमें यह सीखना चाहिए कि वह अपने प्रकाश से किस तरह अंधकार को दूर (हरना) करता है, उसी प्रकार हमें भी अज्ञानता रूपी अंधेरे को दूर करना चाहिए। हमारी धरती (पृथ्वी) बिना किसी स्वार्थ के सभी जीवों का भार उठाती है, हमें भी पृथ्वी से सभी प्राणियों की सच्ची सेवा करना सीखना चाहिए

पद्यांश 5:जलधारा से सीखो आगे, जीवन-पथ में बढ़ना।   और धुएँ से सीखो हरदम, ऊँचे ही पर चढ़ना।
  • व्याख्या: नदी के बहते हुए पानी (जलधारा) से हमें यह सीखना चाहिए कि जीवन के मार्ग (जीवन-पथ) पर रुकावटों के बावजूद हमेशा आगे की ओर कैसे बढ़ते रहना है। और धुएँ से हमें यह शिक्षा लेनी चाहिए कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, हमें हमेशा ऊपर की ओर उठना (उन्नति या तरक्की करना) चाहिए

कविता का मूल संदेश (Moral):

प्रकृति हमारी सबसे अच्छी और सबसे बड़ी शिक्षक है। प्रकृति की हर एक रचना हमें जीवन में सकारात्मक रहने, परोपकार करने और निरंतर आगे बढ़ने का कोई न कोई महत्वपूर्ण संदेश अवश्य देती है।

अभ्यास प्रश्नों के उत्तर

 

1. बातचीत के लिए

प्रश्न 1: आपको इस चित्र में क्या-क्या दिखाई दे रहा है?

उत्तर: इस चित्र में उगता हुआ सूरज, पहाड़, बहती हुई नदी, फलदार पेड़ (संतरे और आम के पेड़), फूल, घास और उड़ते हुए पक्षी दिखाई दे रहे हैं

प्रश्न 2: इनमें से कौन-कौन सी वस्तुएँ आप प्रतिदिन देखते हैं?

उत्तर: हम प्रतिदिन सूरज, पेड़-पौधे, फूल, घास और पक्षी देखते हैं

प्रश्न 3: उगते हुए सूरज को देखकर आपके मन में किस प्रकार के भाव आते हैं?

उत्तर: उगते हुए सूरज को देखकर मन में नया उत्साह, ऊर्जा, ताज़गी और नए दिन की शुरुआत की खुशी का भाव आता है

प्रश्न 4: रंग-बिरंगे फूलों को देखकर आपको कैसा लगता है?

उत्तर: रंग-बिरंगे फूलों को देखकर मन प्रसन्न और आनंदित हो जाता है

2. कविता की बात

2. कविता में किससे सीखने की बात आपको सबसे अच्छी लगी? उसका चित्र बनाइए और नाम लिखिए:

उत्तर: मुझे फूलों से हँसना और सूरज से जगना-जगाना सीखने की बात सबसे अच्छी लगी

(आप कॉपी में किसी भी एक पसंदीदा प्राकृतिक चीज़ जैसे- फूल, सूरज या पेड़ का चित्र बना सकते हैं।)

3. पढ़िए और बताइए कि यह भाव कविता की किस पंक्ति में आया है:

(क) पेड़ों की झुकी डालियों से हमें यह सीखना है कि हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए।

उत्तर: कविता की पंक्ति:   ‘तरु की झुकी डालियों से नित, सीखो शीश झुकाना ।”

(ख) हवा के झोंकों से हमें सीखना है कि हम हमेशा कुछ न कुछ काम करते रहें।

उत्तर: कविता की पंक्ति:     “सीख हवा के झोंकों से लो, कोमल भाव बहाना।”

(ग) नदी-नहर से हमें सीखना है कि जीवन आगे बढ़ने का नाम है और हमें आगे बढ़ते रहना चाहिए।

उत्तर: कविता की पंक्ति:      “जलधारा से सीखो आगे, जीवन-पथ में बढ़ना।”

3. कविता से आगे

प्रश्न 1: सूरज से ‘जगना और जगाना’ सीखने की बात कही गई है। हम सूरज से और क्या-क्या सीख सकते हैं? कोई दो बातें लिखिए –

उत्तर: (क) नियम से रोज़ समय पर काम करना

(ख) बिना किसी भेद-भाव के सबको समान रूप से प्रकाश और ऊर्जा देना

प्रश्न 2: लता और पेड़ों से एक-दूसरे के साथ प्रेम और सद्भाव की बात के लिए कहा गया है। इनसे हम और क्या-क्या सीख सकते हैं? लिखिए –

उत्तर: (क) दूसरों को छाया और आश्रय (परोपकार) देना

(ख) निस्वार्थ भाव से सब कुछ बाँटना (जैसे फल, फूल, हवा)

प्रश्न 3: हम सभी में कोई न कोई विशेषता अवश्य होती है। आप अपने सहपाठी की कौन-सी बात सीखना चाहते हैं?

उत्तर: मैं अपने सहपाठी से हमेशा शांत रहना, साफ़-सुथरा काम करना और दूसरों की मदद करना सीखना चाहता/चाहती हूँ

4. भाषा की बात

 

1. दी गई शब्द-सूची में से कोई दो शब्द लेकर वाक्य बनाइए:
  • तरु (पेड़): हमारे घर के सामने एक बड़ा तरु है

  • पथ (रास्ता/मार्ग): हमें हमेशा सत्य के पथ पर चलना चाहिए

2. ‘दूध और पानी से सीखो, मिलना और मिलाना।‘ रेखांकित शब्दों के समान कुछ और शब्द बनाइए:
  • हँसना और हँसाना

  • खाना और खिलाना

  • चलना और चलाना

  • गिरना और गिराना

  • पढ़ना और पढ़ाना

  • ढ़ना और बढ़ाना
3. ‘स’ और ‘प’ वर्ण से प्रारंभ होने वाले शब्दों को कविता से खोजकर लिखिए:
‘स’ वर्ण से प्रारंभ होने वाले शब्द ‘प’ वर्ण से प्रारंभ होने वाले शब्द

सीखो

पानी

शीश

पेड़ों

सूरज

पृथ्वी

सबको

प्राणी

सेवा

पथ

4. तालिका ‘अ’ तथा ‘ब’ में दिए गए शब्दों का उच्चारण कीजिए और इनमें अंतर पहचानिए:

तालिका ‘अ’ (Words with ‘ड़’)
  1. पड़ा (Pada): यह ‘पड़ना’ क्रिया का भूतकाल रूप है। इसका अर्थ होता है – गिरा हुआ, लेटा हुआ या स्थित।

  2. बड़ा (Bada): इसका अर्थ होता है – आकार में विशाल, उम्र में ज्येष्ठ या महान।

  3. अड़ना (Adna): इसका अर्थ होता है – जिद्द करना, अपनी बात पर टिके रहना, या किसी रुकावट के कारण रुक जाना।

  4. उड़ना (Udna): पंखों की सहायता से हवा में जाना।

  5. कड़ाई (Kadai): इसका अर्थ होता है – सख्ती या कठोरता।

  6. लड़ाई (Ladai): इसका अर्थ होता है – युद्ध, झगड़ा या संघर्ष।

तालिका ‘ब’ (Words with ‘ढ़’)
  1. पढ़ा (Padha): यह ‘पढ़ना’ क्रिया का भूतकाल रूप है। इसका अर्थ होता है – अध्ययन किया या बाचा।

  2. बढ़ा (Badha): यह ‘बढ़ना’ क्रिया का रूप है। इसका अर्थ होता है – विकास हुआ, वृद्धि हुई, या आगे अग्रसर हुआ।

  3. बढ़ना (Badhna): विकास करना, संख्या या आकार में ज्यादा होना, या आगे चलना। 

  4. पढ़ना (Padhna): अध्ययन करना, अक्षरों को समझना या पुस्तक बाचना।

  5. कढ़ाई (Kadhai): कपड़े पर सुई-धागे से बेल-बूटे या फूल बनाने की कला।

  6. चढ़ाई (Chadhai): किसी ऊँची जगह जैसे पहाड़ पर ऊपर की ओर जाने की क्रिया।

5. बूझो तो जानें (पहेलियाँ)

पहेली 1:एक फूल, एक फल है भाई।    दोनों मिलकर बने मिठाई।

 

उत्तर:गुलाब जामुन (गुलाब = फूल, जामुन = फल)

पहेली 2:बिना बाल की पूँछ लिए वह भाग रहा है,   सब सोते, वह रात-रात भर जाग रहा है।
काट-काटकर कागज, कपड़े खुश होता है,    और धरातल के नीचे घर में सोता है।

 

उत्तर:चूहा

अगले पाठ 2 चींटी के प्रश्नोत्तर के लिये यहाँ क्लिक करें ।

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