पाठ 2:बगीचे का घोंघा
1. घोंघे को बगीचे (उद्यान) के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन क्यों लगते थे?
उत्तर: घोंघे को बगीचे के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन इसलिए लगते थे क्योंकि घोंघे बहुत ही धीमी गति से रेंगकर चलते हैं।
2. आप अपने विद्यालय कैसे जाते हैं और आपको कितना समय लगता है?
उत्तर: मैं अपने विद्यालय स्कूल बस (या साइकिल/पैदल) से जाता/जाती हूँ और मुझे पहुँचने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है। (छात्र अपने अनुसार भी उत्तर दे सकते हैं)
3. घोंघा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
उत्तर: घोंघा उद्यान से बाहर इसलिए जाना चाहता था क्योंकि उसे लगता था कि इस बगीचे के बाहर क्या होगा और वह बाहर की दुनिया देखना चाहता था।
4. आपका कहाँ-कहाँ जाने का मन करता है?
उत्तर: मेरा मन पहाड़ों, समुद्र के किनारे, चिड़ियाघर और विज्ञान संग्रहालय जाने का करता है।
5. आप घूमने के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं और किसके साथ जाते हैं?
उत्तर: मैं घूमने के लिए अपने माता-पिता के साथ पार्क, ऐतिहासिक इमारतों और अपने रिश्तेदारों के घर जाता/जाती हूँ।
नीचे दिए गए प्रश्नों के सटीक उत्तर के सामने सूरज का चित्र ( ☼ ) बनाइए—
1. घोंघा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?
2. घोंघे को बड़ा-सा पत्थर पहाड़ जैसा क्यों लगा होगा?
3. घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार क्या देखा?
4. घोंघे की आँखें आश्चर्य से क्यों खुली रह गईं?
उत्तर:
1. उद्यान की दीवार में छेद देखकर घोंघे को कौन-सी बात याद आती थी?
उत्तर: उद्यान की दीवार में छेद देखकर घोंघे को अपनी माँ की बात याद आती थी कि “वहाँ कभी मत जाना। वह दुनिया हमारी दुनिया से बहुत अलग है।”
2. छेद के दूसरी ओर जाते ही घोंघा चकित क्यों रह गया?
उत्तर: छेद के दूसरी ओर जाते ही घोंघा चकित रह गया क्योंकि जितनी दूर तक उसकी आँखें देख सकती थीं, उतना उसने देखा, उसके सामने बहुत बड़ा, लंबा और चौड़ा-सा मैदान था।
3. घोंघे ने ऐसा क्यों कहा होगा कि उद्यान में सब कुछ धीरे-धीरे चलता है?
उत्तर: घोंघे ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि उद्यान में वह अकेला था और उसकी अपनी गति बहुत धीमी थी। बाहर उसने गिलहरी को फुदकते, गेंद को तेज़ी से लुढ़कते और कुत्ते को भागते देखा, जिससे उसे उद्यान की हर चीज़ धीमी लगी।
4. घोंघे की तरह आपको अपने घर, विद्यालय तथा आस-पास क्या-क्या अद्भुत लगता है और क्यों?
उत्तर: मुझे आसमान में उड़ते हवाई जहाज़, इंटरनेट से तुरंत जानकारी मिलना और चुंबक का लोहे को अपनी ओर खींचना अद्भुत लगता है क्योंकि ये चीज़ें आम जीवन से थोड़ी अलग और जादुई लगती हैं।
5. घोंघे ने उद्यान के भीतर और बाहर क्या-क्या देखा? नीचे लिखिए –
उत्तर:
| उद्यान के भीतर | उद्यान के बाहर |
| पौधे और छोटे पेड़ | बहुत बड़ा मैदान (बच्चों के खेलने की जगह) |
| दीवार में एक छेद | सूखा पत्ता, बड़ा-सा पत्थर |
| – | लाल चींटें, गिलहरी, गेंद, कुत्ता |
| – | खजूर का पेड़, बड़ का पेड़ |
1. कहानी में आए निम्न शब्दों के आधार पर वाक्य बनाकर लिखिए –
उत्तर:
-
आश्चर्य: जादूगर का खेल देखकर सभी बच्चे आश्चर्य से भर गए।
-
अद्भुत: ताजमहल की वास्तुकला वास्तव में बहुत अद्भुत है।
-
अचानक: सड़क पार करते समय अचानक एक तेज़ गाड़ी आ गई।
-
छोर: नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक जाना आसान नहीं था।
2. जब घोंघे के ऊपर सूखा पत्ता गिरा, तब उसने ‘वाह!’ न कहकर ‘उई!’ कहा। आपके मुँह से कब ‘वाह’ और ‘उई’ जैसे शब्द निकलते हैं?
उत्तर:
-
वाह!: जब मैं कोई बहुत सुंदर चीज़ (जैसे इंद्रधनुष या सुंदर फूल) देखता/देखती हूँ, तब मुँह से ‘वाह!’ निकलता है।
-
उई!: जब अचानक चोट लग जाती है या काँटा चुभ जाता है, तब दर्द या डर के कारण मुँह से ‘उई!’ निकलता है।
3. घोंघे ने अपने शंख में कौन-कौन सा सामान बाँधा होगा?
उत्तर: घोंघे ने अपने शंख में खाने के लिए कुछ ताज़े फल, पत्ते और शायद आराम करने के लिए कुछ मुलायम तिनके बाँधे होंगे।
नीचे लिखी बातें घोंघे ने कब-कब कहीं? मिलान कीजिए –
“उसी समय खड़-खड़ की ध्वनि आई।” यहाँ सूखे पत्तों के गिरने की ध्वनि ‘खड़-खड़’ जैसी है। इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी –
उत्तर:
-
बादलों का गरजना: गड़-गड़
-
पानी का बरसना: छम-छम / टप-टप
-
नल से बूँदों का गिरना: टप-टप
-
मेंढक का बोलना: टर्र-टर्र
-
घंटी का बजना: टन-टन
-
हवा का बहना: सांय-सांय / सर-सर
घोंघे ने उद्यान से बाहर आकर जो भी देखा, वह किसी-न-किसी रूप में विशेष था। पाठ के आधार पर उनकी विशेषताएँ लिखिए –
उत्तर:
| जो देखा | उसकी विशेषता |
| मैदान | बहुत बड़ा, लंबा-चौड़ा |
| पत्ता | सूखा और भूरा |
| पत्थर | बड़ा-सा (पहाड़ जैसा) |
| चींटें | लाल रंग की, लंबे-पतले पाँवों वाली |
| खजूर का पेड़ | लंबा (जो पूरे आसमान तक जाता था) |
| बड़ का पेड़ | इतना बड़ा कि एक छोर से दूसरे छोर तक दिखाई नहीं देता था |
1. अनुमान लगाकर बताइए कि घोंघा उद्यान में कब से रह रहा होगा।
उत्तर: घोंघा उद्यान में अपने जन्म के समय से ही रह रहा होगा क्योंकि पाठ में बताया गया है कि उसने अपना सारा जीवन उसी बगीचे में बिताया था।
2. घोंघे को उद्यान के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते थे और उसे वापस लौटने में 48 घंटे लगते थे। ऐसा क्यों?
उत्तर: ऐसा इसलिए क्योंकि एक दिन में 24 घंटे होते हैं। दो दिन का मतलब ही 48 घंटे (24 + 24) होता है। अतः जाने और वापस लौटने का समय समान ही था।
3. आप अपने विद्यालय में कितने वर्षों से पढ़ रहे हैं? आपने वहाँ अब तक क्या-क्या देखा है?
उत्तर: मैं अपने विद्यालय में पिछले 4 वर्षों से पढ़ रहा/रही हूँ। मैंने वहाँ बड़े खेल के मैदान, पुस्तकालय, स्मार्ट क्लासरूम, प्रयोगशाला और तरह-तरह के पेड़-पौधे देखे हैं।
4. आपको अपनी कक्षा से पेयजल के स्थान और विद्यालय के मुख्य द्वार तक जाने में कितना समय लगता है?
उत्तर: मुझे अपनी कक्षा से पेयजल के स्थान तक जाने में 2 मिनट और विद्यालय के मुख्य द्वार तक जाने में लगभग 5 मिनट का समय लगता है।
प्रश्न: घोंघे को सबसे पहले बच्चों के खेलने का स्थान दिखाई दिया। बच्चों ने घोंघे को देखा और उससे बातें कीं। (अनुमान लगाइए और लिखिए कि उनके बीच क्या बातचीत हुई होगी?)
संभावित उत्तर (काल्पनिक संवाद):
बच्चे: अरे वाह! तुम कौन हो और इतनी धीरे-धीरे कहाँ जा रहे हो?
घोंघा: मुझे नहीं पहचानते! मैं घोंघा , नहीं तो और कौन? मैं उस दीवार के पीछे वाले छोटे से बगीचे से आया हूँ। मैं तुम्हारी यह बड़ी सी दुनिया देखने निकला हूँ।
बच्चे: अच्छा! पर तुम्हारी पीठ पर यह गोल-गोल क्या है? क्या यह भारी नहीं लगता?
घोंघा: नहीं दोस्त, यह मेरा प्यारा घर (शंख) है! मैं अपना सारा सामान इसी में रखता हूँ। जब मुझे डर लगता है या मैं थक जाता हूँ, तो मैं तुरंत इसके अंदर छिपकर आराम कर लेता हूँ।
बच्चे: तुम इतनी धीरे-धीरे क्यों चलते हो? देखो हम तो कितनी तेज़ी से भागते हैं!
घोंघा: मेरी चाल ही ऐसी है। लेकिन धीरे-धीरे चलकर मैं हर चीज़ को बहुत ध्यान से और मज़े लेकर देख पाता हूँ। तुम्हारी दुनिया बहुत अद्भुत और विशाल है।
बच्चे: क्या तुम्हें हमारी यह जगह पसंद आई?
घोंघा: हाँ, बहुत! यहाँ मैदान बहुत बड़ा है, गेंद तेज़ी से भागती है और पेड़ तो आसमान छू रहे हैं। मैं अब यहीं रहूँगा!
बच्चे: ठीक है घोंघे भाई! चलो, हम तुम्हें अपने और दोस्तों से मिलवाते हैं।
(नोट: यह एक रचनात्मक गतिविधि है। छात्र अपनी कल्पना के अनुसार बच्चों और घोंघे के बीच कोई भी मज़ेदार बातचीत लिख सकते हैं।)











