NCERT CLASS 4 VEENA LESSON 1 SOLUTIONS

पाठ1: “चिड़िया का गीत”

पाठ का नाम: चिड़िया का गीत           कवि का नाम: निरंकार देव ‘सेवक’

संदर्भ :

यह प्यारी सी कविता हमारी कक्षा 4 की हिंदी की पाठ्यपुस्तक से ली गई है, जिसका नाम ‘चिड़िया का गीत’ है। इस कविता को प्रसिद्ध कवि श्री निरंकार देव ‘सेवक’ जी ने लिखा है

प्रसंग :

इस कविता में एक छोटी-सी चिड़िया के जीवन के सफर और उसके बढ़ते हुए अनुभवों के बारे में बताया गया है। जैसे-जैसे चिड़िया बड़ी होती है और बाहर निकलती है, वैसे-वैसे दुनिया को लेकर उसकी सोच और समझ कैसे बदलती है, कवि ने इसका बहुत ही सुंदर और सरल वर्णन किया है।

पद्यांशों की व्याख्या 

पहला पद्यांश :

सबसे पहले मेरे घर का अंडे जैसा था आकार

तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: चिड़िया अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहती है कि जब वह बहुत छोटी थी, तब उसका घर एक गोल अंडे जैसा था। उस समय चिड़िया को लगता था कि यह दुनिया केवल इस अंडे जितनी ही बड़ी है, इसके बाहर और कुछ नहीं है

दूसरा पद्यांश :

फिर मैं निकल गई शाखों पर हरी-भरी थीं जो सुकुमार

तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: जब चिड़िया थोड़ी बड़ी हुई और अंडे से बाहर आई, तो वह पेड़ की कोमल और हरी-भरी डालियों (शाखों) पर आ गई। उन डालियों पर फुदकते हुए चिड़िया को लगने लगा कि बस यह पेड़ और इसकी डालियाँ ही पूरी दुनिया हैं, इससे बड़ा और कुछ नहीं है

तीसरा पद्यांश :

फिर मेरा घर बना घोसला सूखे तिनकों से तैयार

तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार।

व्याख्या: इसके बाद, जब चिड़िया सूखे तिनकों से बने हुए अपने प्यारे से घोंसले में रहने लगी, तो उसकी सोच फिर बदली। अब वह अपने घोंसले में बैठकर यह सोचने लगी कि शायद यह तिनकों से बना हुआ घोंसला ही मेरी पूरी दुनिया है

चौथा पद्यांश :

आखिर जब मैं आसमान में उड़ी दूर तक पंख पसार

तभी समझ में मेरी आया बहुत बड़ा है यह संसार।

व्याख्या: अंत में, जब चिड़िया के पंख मजबूत हो गए और उसने अपने पंख फैलाकर (पसार कर) खुले और नीले आसमान में बहुत दूर तक उड़ान भरी, तब जाकर उसे असली सच्चाई का पता चला। खुले आसमान से पूरी धरती, नदियों और पहाड़ों को देखकर उसे समझ में आ गया कि यह दुनिया (संसार) बहुत विशाल और बहुत बड़ी है, यह केवल किसी अंडे, पेड़ या घोंसले तक सीमित नहीं है

विशेष (कविता से हमें क्या सीख मिली?)

प्यारे बच्चों, इस कविता से हमें यह सीख मिलती है कि जब हम छोटे होते हैं, तो हमारा ज्ञान भी सीमित होता है। लेकिन जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, घर से बाहर निकलते हैं, नई-नई चीजें देखते और सीखते हैं, तो हमारी समझ का दायरा भी आसमान में उड़ने वाली चिड़िया की तरह बहुत बड़ा हो जाता है।

अभ्यास कार्य

बातचीत के लिए:

 

प्रश्न 1: पशु-पक्षियों के लिए घर आवश्यक है या नहीं? कारण भी बताइए।

उत्तर: हाँ बच्चों, पशु-पक्षियों के लिए भी घर बहुत आवश्यक है। घर उन्हें सर्दी, गर्मी, बारिश  से बचाता है

प्रश्न 2: आपके परिवार के सदस्य घर से बाहर क्यों जाते हैं?

उत्तर: हमारे परिवार के सदस्य काम करने, दफ़्तर जाने, बाज़ार से सामान लाने और बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए घर से बाहर जाते हैं

प्रश्न 3: जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं या बाहर से आते हैं तो आपको कैसा लगता है और क्यों?

उत्तर: जब परिवार के सदस्य बाहर जाते हैं तो हमें उनकी याद आती है, लेकिन जब वे वापस घर आते हैं तो हमें बहुत खुशी होती है क्योंकि हम उनके साथ समय बिता सकते हैं

प्रश्न 4: जब कोई अतिथि आपके घर आता है या आप किसी संबंधी के यहाँ जाते हैं तो आपको कैसा लगता है?

उत्तर: जब कोई अतिथि हमारे घर आता है या हम किसी के यहाँ जाते हैं तो हमें बहुत अच्छा लगता है। हम मिलकर खूब बातें करते हैं और खेलते हैं

प्रश्न 5: क्या आपको लगता है कि पक्षियों की तरह हम भी धीरे-धीरे बड़े होते हैं और फिर उनकी तरह ही संसार देखते हैं? अपने अनुभव साझा कीजिए।

उत्तर: हाँ बच्चों, बिल्कुल! जैसे एक छोटी सी चिड़िया पहले अंडे में, फिर घोंसले में और अंत में खुले आसमान में उड़कर दुनिया देखती है, वैसे ही हम भी पहले सिर्फ अपने घर और माता-पिता को जानते हैं। फिर हम स्कूल जाते हैं, नई-नई चीज़ें सीखते हैं, नए दोस्त बनाते हैं, और बड़े होकर पूरी दुनिया को समझते हैं।

कविता की बात:

 

प्रश्न 1: नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प दिए गए हैं। प्रश्नों के उत्तर में एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं –

क. घोंसले से संबंधित उपयुक्त वाक्य को चिह्नित कीजिए –

  • घोंसला पक्षियों का घर होता है।

  • घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।

  • पक्षियों का घोंसला केवल पेड़ों पर होता है।

  • कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।

उत्तर: – ✅ घोंसला पक्षियों का घर होता है।
✅ घोंसला सूखे तिनकों से बनाया जाता है।
✅ कुछ पक्षियों का घोंसला हमारे घरों में भी होता है।

ख. कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ का प्रयोग निम्नलिखित में से किसके लिए किया गया है –

  • संसार

  • आकाश

  • घर

उत्तर: ✅ घर

ग. ‘तब मैं यही समझती थी बस इतना-सा ही है संसार’ इन पंक्तियों में ‘इतना-सा’ का अर्थ है –

  • बहुत छोटा

  • बहुत लंबा

  • बहुत बड़ा

  • रंग-बिरंगा

उत्तर: ✅ बहुत छोटा

प्रश्न 2: नीचे दी गई कविता की पंक्तियों का मिलान उनके नीचे दी गई उपयुक्त पंक्तियों से कीजिए –

उत्तर:

कविता की पहली पंक्ति 
कविता की दूसरी/मिलान वाली पंक्ति 

सबसे पहले मेरे घर का ,अंडे जैसा था आकार

तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार

तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

फिर मेरा घर बना घोंसला ,सूखे तिनकों से तैयार

तब मैं यही समझती थी
बस इतना-सा ही है संसार।

आखिर जब मैं आसमान में,  उड़ी दूर तक पंख पसार

तभी समझ में मेरी आया
बहुत बड़ा है यह संसार।

सोचिए और लिखिए:

 

प्रश्न 1: चिड़िया को यह संसार कब-कब छोटा लगा?

उत्तर: जब वह अंडे में थी, फिर घोंसले में थी और बाद में पेड़ की शाखाओं तक ही पहुँची थी, तब उसे संसार छोटा लगता था।

प्रश्न 2: खुले आकाश में उड़ते समय चिड़िया ने क्या-क्या देखा होगा जिससे उसे लगा कि संसार बहुत बड़ा है?

उत्तर: उसने पेड़, पहाड़, नदियाँ, खेत, जंगल, गाँव, शहर, सड़कें, तालाब और अनेक पक्षियों को देखा होगा। इसलिए उसे संसार बहुत बड़ा लगा।

प्रश्न 3: प्रायः सुबह-शाम पक्षियों की चहचहाहट (कलरव) सुनाई देती है। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर: सुबह के समय पक्षी भोजन की तलाश में निकलते हैं और शाम को वे अपने-अपने घोंसलों में लौटकर एक-दूसरे से मिलते हैं, इसलिए वे खुशी से चहचहाते हैं।

समझ और अनुभव:

 

प्रश्न 1: जब कोई शिशु चिड़िया घोंसले से बाहर आती है तो उसे लगता है कि संसार बहुत बड़ा है। क्या आपको भी घर से बाहर निकलते समय ऐसा ही अनुभव होता है और क्यों?

उत्तर: हाँ, मुझे भी ऐसा अनुभव होता है। जब मैं नई जगहों पर जाता/जाती हूँ, तो वहाँ की बड़ी-बड़ी इमारतें, सड़कें, पेड़-पौधे और नए लोग देखकर लगता है कि संसार बहुत विशाल है।

प्रश्न 2: एक शिशु पक्षी की तरह आप भी धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं। अब तक आपमें भी कई परिवर्तन आए हैं। नीचे दिए गए शीर्षकों के अनुसार अपने अंदर आए परिवर्तनों को लिखिए

उत्तर:

परिवर्तन के शीर्षक 
मेरे अंदर आए परिवर्तन
  • शारीरिक परिवर्तन
  • मेरी लंबाई और वजन बढ़ गया है, अब मैं खुद दौड़-भाग सकता/सकती हूँ और अपने काम कर सकता/सकती हूँ।
  • रुचियों में परिवर्तन
  • पहले मुझे सिर्फ खिलौनों से खेलना पसंद था, अब मुझे दोस्तों के साथ क्रिकेट खेलना, कहानियाँ पढ़ना और सुंदर चित्र बनाना अच्छा लगता है।
  • समझ में परिवर्तन
  • अब मैं सही और गलत में अंतर समझने लगा/लगी हूँ और बड़ों की बातें बेहतर समझता/समझती हूँ।
  • खान-पान में परिवर्तन
  • चित्रकारी
  • खेल
  • गीत-संगीत
  • पढ़ना-लिखना
  • नृत्य और अभिनय
  • पहले मैं बहुत सी सब्जियाँ खाने में नखरे करता/करती थी, अब मैं सभी हरी सब्जियाँ और फल शौक से खाता/खाती हूँ।
  •  पहले से बेहतर चित्र बना लेता/लेती हूँ।
  • अब मैं नए-नए खेल खेलता/खेलती हूँ।
  • मुझे नए गीत सीखना अच्छा लगता है।
  •  मेरी पढ़ने और लिखने की क्षमता बढ़ी है।
  •  अब मैं विद्यालय के कार्यक्रमों में भाग लेता/लेती हूँ।
प्रश्न 3: पहले चिड़िया को लगता था कि यह संसार बहुत छोटा है परंतु सच्चाई कुछ और ही थी। उस समय आपको कैसा लगा जब आपने इनमें से किसी एक को पहली बार देखा – रेलगाड़ी, मॉल, पहाड़, मेट्रो ट्रेन, समुद्र, वायुयान, जंगल, जलयान, चार या छह वीथियों वाली सड़कें, खेत, रेगिस्तान या मरुस्थल, नदी।

उत्तर: पहली बार इन्हें देखकर मुझे बहुत आश्चर्य और खुशी हुई। मुझे लगा कि हमारा संसार वास्तव में बहुत बड़ा और सुंदर है।

चित्रों की भाषा:

 

प्रश्न: नीचे दिए गए चित्रों को ध्यान से देखिए। चित्र से मेल खाती कविता की कुछ पंक्तियाँ उदाहरण के रूप में दी गई हैं। अब कविता की उपयुक्त पंक्तियों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –

उत्तर:(घोंसले और शिशु चिड़िया वाले चित्र के लिए)

फिर मेरा घर बना घोंसला, सूखे तिनकों से तैयार।

तब मैं यही समझती थी, बस इतना-सा ही है संसार।

अनुमान और कल्पना:

 

प्रश्न 1. चिड़िया ने अंततः इतनी दूर तक उड़ान क्यों भरी होगी?

उत्तर:चिड़िया ने भोजन की खोज करने, नई जगहें देखने, अपने अनुभव बढ़ाने और संसार को जानने के लिए दूर तक उड़ान भरी होगी।

प्रश्न 2. पक्षी लंबी दूरी तय करने के बाद भी अपना घोंसला कैसे ढूँढ़ लेते होंगे?

उत्तर:पक्षी अपनी तीव्र स्मरण शक्ति, दिशा पहचानने की क्षमता तथा सूर्य, पेड़-पौधों और प्राकृतिक संकेतों की सहायता से अपना घोंसला ढूँढ़ लेते हैं।

प्रश्न 3. हमारे पूर्वजों को कैसे पता चला होगा कि संसार बहुत बड़ा है?

उत्तर:हमारे पूर्वज यात्रा करते थे, नई-नई जगहों पर जाते थे, समुद्री यात्राएँ करते थे और खोज करते थे। इन्हीं अनुभवों से उन्हें संसार की विशालता का ज्ञान हुआ।

प्रश्न 4. क्या पक्षियों के माता-पिता भी उन्हें उड़ने से पहले कुछ निर्देश देते होंगे? यदि हाँ, तो वे क्या-क्या हो सकते हैं?उत्तर: 

हाँ, वे उन्हें सावधानी से उड़ने, शत्रुओं से बचने, भोजन ढूँढ़ने, बहुत दूर न जाने और समय पर घोंसले में लौट आने की सीख देते होंगे।

कल्पना की उड़ान:

उत्तर: बच्चे कल्पना करेंगे और अपने साथियों से अपने विचार साझा करेंगे।

 

आकार-प्रकार

 

प्रश्न: कविता में ‘अंडे जैसा था आकार’ का उल्लेख है। नीचे कुछ और चित्र दिए गए हैं जो अलग-अलग आकृतियों के हैं। चित्रों के नीचे उनके नाम लिखिए।

उत्तर:

चित्र का विवरण  आकृति (आकार) का नाम

पहला चित्र

गोल (वृत्त)

दूसरा चित्र

तीसरा चित्र

वर्गाकार(वर्ग)   

आयताकार(आयत)

चौथा  चित्र

तिकोना (त्रिभुज)

भाषा की बात

 

प्रश्न 1: “फिर मैं निकल गई शाखों पर, हरी-भरी थीं जो सुकुमार”, कविता की इस पंक्ति में ‘सुकुमार’ शब्द आया है। यह ‘सु’ और ‘कुमार’ के मेल से बना है जिसका अर्थ है – कोमल या कोमल अंगों वाला। आप भी इसी प्रकार कुछ नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ खोजिए।

उत्तर:

शब्द का हिस्सा 1  शब्द का हिस्सा 2  नया शब्द  अर्थ 

सु

कुमार

सुकुमार

कोमल अंगों वाला

सु

योग्य

सुयोग्य

बहुत योग्य/अच्छा

सु

यश

सुयश

अच्छी कीर्ति/प्रसिद्धि

सु

कर्म

सुकर्म

अच्छे कर्म

सु

वास

सुवास

अच्छी सुगंध

सु

दर्शन

सुदर्शन

देखने में सुंदर
प्रश्न 2: नीचे दिए गए वाक्यों में कुछ रिक्त स्थान हैं और कुछ शब्द रेखांकित किए गए हैं। उन शब्दों से वाक्यों को पूरा कीजिए जो रेखांकित शब्दों के विपरीत अर्थ रखते हैं –

उत्तर: (क) सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डिब्बों में डालें।

(ख) दिल्ली मेरे घर से दूर है लेकिन गुवाहाटी पास में है।

(ग) अनवर कब आया और कब गया, पता ही नहीं चला।

(घ) कोई भी काम न तो बड़ा होता है और न ही छोटा

प्रश्न 3: आइये,अब एक रोचक संवाद पढ़ते हैं

इतना-सा, उतना-सा, जितना-सा और कितना-सा का  वाक्यों में प्रयोग कीजिए और उनके अर्थ भी
समझाइए। फ़िर आपको राजू जितने रुपये मिल जाएँगे।

अब नीचे दिए गए शब्दों से वाक्य बनाकर सलमा की सहायता कीजिए – 

उत्तर:

  • इतना-सा: मेरे पास बस इतना-सा ही काम बचा है।

  • उतना-सा: मुझे भी उतना-सा ही दूध देना जितना दीदी को दिया है।

  • जितना-सा: जितना-सा खाना तुम खा सको, उतना ही लेना।

  • कितना-सा: तुम्हारे पास अब कितना-सा समय रह गया है?

पाठ से आगे

 

प्रश्न: पक्षी भोजन की खोज में घोंसले से बाहर उड़ते हैं। यह जानना रोचक होगा कि कौन-सा पक्षी क्या खाता है। नीचे कुछ पक्षियों के नाम दिए गए हैं। पता कीजिए कि वे क्या खाते हैं –

उत्तर:

पक्षियों के नाम 
वे क्या खाते हैं
 

  • बाज
  • हंस
  • तोता
 

  • छोटे पक्षी, चूहे, साँप
  • जलीय पौधे, घास, दाने
  • हरी मिर्च, अमरूद, फल, दाने
  • बगुला
  • मछलियाँ, मेंढक, कीड़े
  • कबूतर
  • अनाज के दाने, बीज, बाजरा
  • उल्लू
  • गौरैया
  • चूहे, कीड़े, छोटे जीव
  • छोटे कीड़े, अनाज के दाने

आनन्दमयी गतिविधि

प्रश्न 3: नीचे पशु-पक्षियों से संबंधित कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पहेलियों का उपयुक्त चित्रों से मिलान कीजिए-

बोलिए फटाफट (पहेलियाँ)

 

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