यूपीटीईटी 2019 solved-paper (CDP ) Shikshan Seva

भाग – I : बाल विकास एवं शिक्षण विधि (Child Development and Teaching Method)UPTET 2019

प्रश्न 1 से 10:

  1. यदि शिक्षक कक्षा में एक छात्र को समस्यात्मक बालक के रूप में पाता है, तो उसे

(1) तत्काल घर वापस भेज देना चाहिए

(2) बच्चे को नजरअन्दाज कर देना चाहिए

(3) बच्चे को दण्ड देना चाहिए

(4) बच्चे को परामर्श देना चाहिए

उत्तर: (4) बच्चे को परामर्श देना चाहिए

व्याख्या: एक शिक्षक का दायित्व केवल पढ़ाना ही नहीं, बल्कि बच्चों की समस्याओं को समझना भी है। यदि कोई बच्चा समस्यात्मक व्यवहार कर रहा है, तो उसे दंडित करने या घर भेजने के बजाय शिक्षक को उसकी काउंसलिंग (परामर्श) करनी चाहिए ताकि समस्या के मूल कारण (जैसे पारिवारिक या मानसिक तनाव) का पता लगाकर उसे सुधारा जा सके।

  1. पाठ्य सहगामी क्रियाएँ मुख्यतः सम्बन्धित है

(1) छात्रों के मानसिक विकास से

(2) छात्रों के सर्वांगीण विकास से

(3) शैक्षिक संस्थानों के विकास से

(4) छात्रों के वृत्तिक विकास से

उत्तर: (2) छात्रों के सर्वांगीण विकास से

व्याख्या: पाठ्य सहगामी क्रियाएं (Co-curricular activities) जैसे खेलकूद, नाटक, वाद-विवाद आदि शिक्षा का एक अहम हिस्सा हैं। ये सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं देतीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास (अर्थात सर्वांगीण विकास) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

  1. निम्न में से किसने अधिगम सिद्धान्त का प्रतिपादन नहीं किया ?

(1) थार्नडाइक

(2) स्किनर

(3) कोहलर

(4) बी.एस. ब्लूम

उत्तर: (4) बी.एस. ब्लूम

व्याख्या: थार्नडाइक (प्रयास व त्रुटि), स्किनर (क्रिया-प्रसूत) और कोहलर (सूझ का सिद्धांत) ने ‘सीखने’ (अधिगम) के सिद्धांत दिए हैं। जबकि बी.एस. ब्लूम ने अधिगम का सिद्धांत नहीं दिया, बल्कि उन्होंने ‘शैक्षिक उद्देश्यों का वर्गीकरण’ (Taxonomy of Educational Objectives) प्रस्तुत किया था।

  1. शिक्षा में अवरोधन का तात्पर्य है

(1) किसी बालक का एक वर्ष से अधिक समय तक एक ही कक्षा में रहना

(2) बालक का विद्यालय न जाना

(3) बालक का विद्यालय में प्रवेश न लेना

(4) बालक द्वारा विद्यालय छोड़ देना

उत्तर: (1) किसी बालक का एक वर्ष से अधिक समय तक एक ही कक्षा में रहना

व्याख्या: शिक्षा के क्षेत्र में ‘अवरोधन’ (Stagnation) का अर्थ है जब कोई बच्चा परीक्षा में फेल होने के कारण एक ही कक्षा में एक से अधिक वर्ष तक रुक जाता है। (बीच में पढ़ाई छोड़ देने को ‘अपव्यय’ यानी Wastage कहा जाता है।)

  1. निम्न में से किस कौशल में पूर्व ज्ञान का परीक्षण आता है ?

(1) प्रदर्शन कौशल

(2) प्रस्तावना कौशल

(3) उद्दीपन-परिवर्तन कौशल

(4) समापन कौशल

उत्तर: (2) प्रस्तावना कौशल

व्याख्या: कक्षा में कोई भी नया पाठ शुरू करने से पहले शिक्षक ‘प्रस्तावना’ (Introduction) देता है। प्रस्तावना कौशल का मुख्य उद्देश्य ही यह होता है कि शिक्षक कुछ प्रश्न पूछकर बच्चों के ‘पूर्व ज्ञान’ (पहले से क्या जानते हैं) का परीक्षण करे और उसे नए पाठ से जोड़े।

  1. निम्न में किस सिद्धान्त को पुनर्बलन का सिद्धान्त भी कहते हैं ?

(1) क्रिया प्रसूत अनुबन्धन सिद्धान्त

(2) उद्दीपक अनुक्रिया सिद्धान्त

(3) शास्त्रीय अनुबन्धन सिद्धान्त

(4) सूझ का सिद्धान्त

उत्तर: (1) क्रिया प्रसूत अनुबन्धन सिद्धान्त

व्याख्या: बी.एफ. स्किनर के ‘क्रिया-प्रसूत अनुबंधन सिद्धांत’ (Operant Conditioning) को ही पुनर्बलन का सिद्धांत (Reinforcement Theory) कहा जाता है क्योंकि इसमें किसी क्रिया (व्यवहार) के बार-बार दोहराए जाने के लिए सकारात्मक या नकारात्मक पुनर्बलन (इनाम या दंड) को सबसे अहम माना गया है।

  1. निम्न में से कौन-सी अवस्था ब्रूनर के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त का अंग नहीं है ?

(1) क्रियात्मक अवस्था

(2) प्रतिबिम्बात्मक अवस्था

(3) आन्त प्रज्ञ अवस्था

(4) संकेतात्मक अवस्था

उत्तर: (3) आन्त प्रज्ञ अवस्था

व्याख्या: जेरोम ब्रूनर ने संज्ञानात्मक विकास की 3 अवस्थाएं बताई हैं: क्रियात्मक (Enactive), प्रतिबिम्बात्मक (Iconic), और संकेतात्मक (Symbolic)। ‘आन्त प्रज्ञ अवस्था’ (Intuitive stage) जीन पियाजे के सिद्धांत की (पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था की उप-अवस्था) है, ब्रूनर की नहीं।

  1. मॉरीशन ने बोध स्तर के शिक्षण प्रतिमान में पाँच पदों का वर्णन किया है वे हैं
  2. प्रस्तुतीकरण
  3. खोज

III. संगठन/व्यवस्था

  1. आत्मीकरण
  2. वाचन/अभिव्यक्तिकरण

इनकी सही क्रम है

(1) I, II, III, IV, V

(2) II, I, IV, III, V

(3) IV, V, III, I, II

(4) II, I, III, IV, V

उत्तर: (2) II, I, IV, III, V

व्याख्या: मॉरीसन (Morrison) के ‘बोध स्तर’ (Understanding Level) के 5 पदों का सही और तार्किक क्रम है: सबसे पहले विषय की खोज (Exploration), फिर उसे प्रस्तुत करना (Presentation), उसके बाद उसे आत्मसात करना (Assimilation), फिर उसका संगठन (Organization), और अंत में उसे बोलकर व्यक्त करना (Recitation/वाचन)।

  1. निम्न में से कौन-सा संज्ञानात्मक क्षेत्र से संबंधित नहीं है ?

(1) ज्ञान

(2) अनुप्रयोग

(3) अनुमूल्यन

(4) बोध

उत्तर: (3) अनुमूल्यन

व्याख्या: ब्लूम की टैक्सोनॉमी के ‘संज्ञानात्मक क्षेत्र’ (Cognitive Domain) में 6 स्तर होते हैं: ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण और मूल्यांकन। ‘अनुमूल्यन’ (Valuing) भावात्मक क्षेत्र (Affective Domain) का हिस्सा है।

  1. निम्न में से कौन-सा अधिगम का वक्र नहीं है ?

(1) उन्नतोदर (उत्तल)

(2) मिश्रित

(3) नतोदर

(4) लम्बवत्

उत्तर: (4) लम्बवत्

व्याख्या: सीखने के वक्र (Learning Curves) मुख्य रूप से 4 प्रकार के होते हैं: सरल रेखीय, उन्नतोदर (Convex – पहले तेज़ फिर धीमा), नतोदर (Concave – पहले धीमा फिर तेज़) और मिश्रित (S-आकार का)। ‘लम्बवत्’ (Longitudinal) अधिगम का कोई वक्र नहीं होता।

प्रश्न 11  से  20:

  1. व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही अधिगम हैयह किसने कहा है ?

(1) क्रो एण्ड क्रो

(2) गिलफर्ड

(3) वुडवर्थ

(4) स्किनर

उत्तर: (2) गिलफर्ड

व्याख्या: यह मनोविज्ञान में ‘अधिगम’ (Learning) की एक अत्यंत प्रसिद्ध परिभाषा है, जिसे मनोवैज्ञानिक जे.पी. गिलफोर्ड (J.P. Guilford) ने दिया था। इसका अर्थ है कि किसी दूसरे के व्यवहार को देखकर या अनुभव करके हमारे खुद के व्यवहार में जो बदलाव आता है, वही सीखना है।

  1. सूची – A तथा सूची B को सुमेलित कीजिए ।

सूची – A (विद्वान)

  1. ब्रुनर
  2. ऑसुबेल
  3. ग्लेजर
  4. गॉर्डन

सूची – B (शिक्षण प्रतिमान)

  1. बुनियादी शिक्षण प्रतिमान
  2. सायनेक्टिक्स शिक्षण प्रतिमान

III. अग्रिम संगठक शिक्षण प्रतिमान

  1. सम्प्रत्यय उपलब्धि शिक्षण प्रतिमान
  2. पृच्छा प्रशिक्षण प्रतिमान

कूट:

(1) a-III, b-I, c-II, d-V

(2) a-IV, b-III, c-II, d-I

(3) a-IV, b-III, c-I, d-II

(4) a-I, b-II, c-III, d-V

उत्तर: (3) a-IV, b-III, c-I, d-II

व्याख्या: – जेरोम ब्रूनर = सम्प्रत्यय उपलब्धि प्रतिमान (Concept Attainment Model)

  • डेविड ऑसुबेल = अग्रिम संगठक प्रतिमान (Advance Organizer Model)
  • रॉबर्ट ग्लेजर = बुनियादी शिक्षण प्रतिमान (Basic Teaching Model)
  • विलियम गॉर्डन = सायनेक्टिक्स शिक्षण प्रतिमान (Synectics Model)
  1. समस्या समाधान का प्रथम चरण है

(1) परिकल्पना का निर्माण

(2) समस्या की पहचान

(3) आँकडा संग्रहण

(4) परिकल्पना का परीक्षण

उत्तर: (2) समस्या की पहचान

व्याख्या: वैज्ञानिक या मनोवैज्ञानिक तरीके से किसी भी समस्या को सुलझाने (Problem Solving) का सबसे पहला और बुनियादी कदम ‘समस्या की पहचान’ (Identification of problem) करना होता है। जब तक पता ही नहीं होगा कि समस्या क्या है, तब तक परिकल्पना (Hypothesis) या डेटा इकट्ठा नहीं किया जा सकता।

  1. बालकों का अधिगम सर्वाधिक प्रभावशाली होगा जब

(1) शिक्षक अधिगम प्रक्रिया में आगे होकर बालकों को निष्क्रिय रखेगा ।

(2) बालकों का संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनोचालक पक्षों का विकास होगा ।

(3) पढ़ने-लिखने एवं गणितीय कुशलताओं पर ही बल होगा।

(4) शिक्षण व्यवस्था एकाधिकारवादी होगी ।

उत्तर: (2) बालकों का संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनोचालक पक्षों का विकास होगा ।

व्याख्या: सीखना (अधिगम) तभी सबसे प्रभावी माना जाता है जब वह बच्चे के सभी पक्षों का विकास करे। इसमें संज्ञानात्मक (दिमाग), भावात्मक (भावनाएं) और मनोचालक/क्रियात्मक (शारीरिक कौशल) तीनों पक्ष शामिल होने चाहिए। शिक्षक का तानाशाह होना या बच्चों का निष्क्रिय होना गलत है।

  1. स्मृति स्तर एवम् बोध स्तर के शिक्षण प्रतिमान की संरचना में कौन-सा सोपान उभयनिष्ठ है ?

(1) तैयारी

(2) अन्वेषण

(3) सामान्यीकरण

(4) प्रस्तुतीकरण

उत्तर: (4) प्रस्तुतीकरण

व्याख्या: स्मृति स्तर (Memory Level – हर्बर्ट द्वारा दिया गया) और बोध स्तर (Understanding Level – मॉरीसन द्वारा दिया गया) दोनों शिक्षण प्रतिमानों में ‘प्रस्तुतीकरण’ (Presentation – विषय को बच्चों के सामने रखना) का चरण कॉमन (उभयनिष्ठ) है।

  1. मानव-विकास का प्रारम्भ होता है

(1) शैशवावस्था से

(2) पूर्व-बाल्यावस्था से

(3) गर्भावस्था से

(4) उत्तर-बाल्यावस्था से

उत्तर: (3) गर्भावस्था से

व्याख्या: बाल मनोविज्ञान के अनुसार, किसी भी मनुष्य का विकास उसके जन्म लेने के बाद शुरू नहीं होता, बल्कि माता के गर्भ (Pregnancy) में आते ही शुरू हो जाता है। अतः विकास का आरंभ ‘गर्भावस्था’ (Pre-natal stage) से ही माना जाता है।

  1. द कंडीशन्स ऑफ लर्निंगपुस्तक के लेखक है

(1) आई.पी. पावलव

(2) बी.एफ. स्किनर

(3) ई.एल. थार्नडाइक

(4) आर.एम. गेने

उत्तर: (4) आर.एम. गेने

व्याख्या: ‘The Conditions of Learning’ (सीखने की शर्तें) नामक प्रसिद्ध पुस्तक रॉबर्ट एम. गेने (R.M. Gagne) ने लिखी है। इसी पुस्तक में उन्होंने अधिगम के 8 प्रकार (श्रृंखला अधिगम) को एक पिरामिड के रूप में प्रस्तुत किया है।

  1. किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, हमला व विरोध की अवस्था है।” यह कथन किसका है ?

(1) क्रो एण्ड क्रो

(2) स्टेन्ले हॉल

(3) जरशील्ड

(4) सिम्पसन

उत्तर: (2) स्टेन्ले हॉल

व्याख्या: यह बाल मनोविज्ञान की सबसे ज्यादा पूछी जाने वाली परिभाषाओं में से एक है। ‘किशोर मनोविज्ञान के जनक’ अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टेन्ले हॉल (G. Stanley Hall) ने अपनी पुस्तक ‘Adolescence’ में किशोरावस्था को तूफ़ान और भारी संघर्ष का काल बताया है।

  1. सूक्ष्म शिक्षण के भारतीय प्रतिमान में कुल कितना समय लगता है?

(1) 30 मिनट

(2) 40 मिनट

(3) 36 मिनट

(4) 45 मिनट

उत्तर: (3) 36 मिनट

व्याख्या: सूक्ष्म शिक्षण (Micro-teaching) शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की तकनीक है। NCERT द्वारा विकसित इसके ‘भारतीय प्रतिमान’ (Indian Model) में पूरा चक्र 36 मिनट का होता है। (शिक्षण 6 मिनट, फीडबैक 6 मिनट, पुनः योजना 12 मिनट, पुनः शिक्षण 6 मिनट, पुनः फीडबैक 6 मिनट)।

  1. सीखने का पठार सीखने की प्रक्रिया के मुख्य अभिलक्षण हैं जो उस स्थिति को प्रकट करते हैं जिसमें सीखने की प्रक्रिया में कोई उन्नति नहीं होती।” यह कथन किसका है ?

(1) स्किनर

(2) हालिंगवर्थ

(3) गेट्स व अन्य

(4) रॉस

उत्तर: (4) रॉस

व्याख्या: यह परिभाषा मनोवैज्ञानिक रॉस (Ross) ने दी थी। जब हम कुछ सीखते हैं तो एक समय ऐसा आता है जब लाख प्रयास के बाद भी हमारे सीखने की गति में कोई सुधार नहीं दिखता। ग्राफ पर बनी इसी सपाट स्थिति को ‘सीखने का पठार’ (Learning Plateau) कहते हैं।

प्रश्न 2 1 से 30:

  1. स्तम्भ A तथा स्तम्भ B को सुमेलित कीजिए ।

स्तम्भ – A

  1. एनिमल इंटैलिजेन्स
  2. पुनर्बलन की अनुसूची
  3. सारगर्भिता का नियम
  4. अनुकूलन

स्तम्भ – B

  1. गेस्टॉल्ट
  2. पियाजे

III. थॉर्नडाइक

  1. स्किनर

कूट:

(1) a-III, b-IV, c-I, d-II

(2) a-II, b-IV, c-III, d-I

(3) a-I, b-IV, c-III, d-II

(4) a-II, b-IV, c-I, d-III

उत्तर: (1) a-III, b-IV, c-I, d-II

व्याख्या: – Animal Intelligence (जानवरों पर प्रयोग व पुस्तक) = थॉर्नडाइक

  • Schedule of Reinforcement (पुनर्बलन अनुसूची) = स्किनर
  • Law of Pragnanz (सारगर्भिता) = गेस्टाल्ट मनोविज्ञान
  • Adaptation (अनुकूलन) = जीन पियाजे
  1. विकास कभी न समाप्त होने वाली प्रक्रिया है।” यह कथन विकास के किस सिद्धान्त से सम्बन्धित है ?

(1) निरन्तरता का सिद्धान्त

(2) एकीकरण का सिद्धान्त

(3) अन्तःक्रिया का सिद्धान्त

(4) अन्तः सम्बन्ध का सिद्धान्त

उत्तर: (1) निरन्तरता का सिद्धान्त

व्याख्या: बाल विकास का ‘निरंतरता का सिद्धांत’ (Principle of Continuity) यह बताता है कि मनुष्य का विकास माँ के गर्भ से शुरू होकर मृत्यु तक लगातार (लगातार) चलता रहता है, यह कभी रुकता नहीं है (भले ही इसकी गति धीमी या तेज हो जाए)।

  1. संविधान के किस संशोधन से शिक्षा एक मौलिक अधिकार बन गयी है ?

(1) 22 वें संशोधन

(2) 25 वें संशोधन

(3) 86 वें संशोधन

(4) 52 वें संशोधन

उत्तर: (3) 86 वें संशोधन

व्याख्या: भारतीय संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा अनुच्छेद 21(A) जोड़ा गया। इसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा को एक मौलिक (मूल) अधिकार बना दिया गया।

  1. अभिप्रेरणा के मूल-प्रवृत्ति सिद्धान्त के प्रतिपादक थे

(1) विलियम जेम्स

(2) अब्राहम मैस्लो

(3) मैक्डूगल

(4) सिम्पसन

उत्तर: (3) मैक्डूगल

व्याख्या: अभिप्रेरणा (Motivation) का ‘मूल प्रवृत्ति सिद्धांत’ (Instinct Theory) विलियम मैकडूगल (William McDougall) ने दिया था। उन्होंने बताया कि इंसानों में 14 प्रकार की जन्मजात मूल प्रवृत्तियां (जैसे पलायन, जिज्ञासा) होती हैं जो उन्हें कोई भी काम करने के लिए प्रेरित करती हैं।

  1. विकास की किस अवस्था को कोल तथा ब्रूस ने “संवेगात्मक विकास का अनोखा काल” कहा है ?

(1) किशोरावस्था

(2) बाल्यावस्था

(3) शैशवावस्था

(4) प्रौढ़ावस्था

उत्तर: (2) बाल्यावस्था

व्याख्या: मनोवैज्ञानिक कोल और ब्रूस ने ‘बाल्यावस्था’ (Childhood) को जीवन का और विशेष रूप से संवेगात्मक विकास का ‘अनोखा काल’ (Unique period) कहा है, क्योंकि इस उम्र में बच्चों की भावनाएं और रुचियां बहुत तेज़ी से बदलती और विकसित होती हैं।

  1. किसने बहुविमात्मक प्रज्ञा का प्रत्यय दिया ?

(1) गार्डनर

(2) स्पीयरमैन

(3) गोलमैन

(4) जॉन मेयर

उत्तर: (1) गार्डनर

व्याख्या: ‘बहुविमात्मक प्रज्ञा’ यानी ‘बहु-बुद्धि का सिद्धांत’ (Theory of Multiple Intelligence) हावर्ड गार्डनर (Howard Gardner) ने दिया है। उन्होंने बताया कि बुद्धि कोई एक तत्व नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की (जैसे भाषाई, तार्किक, संगीतमय आदि) स्वतंत्र बुद्धियों का एक समूह है।

  1. डिस्लेक्सिया में यह करने में कठिनाई होती है

(1) बोलने में

(2) व्यक्त करने में

(3) पढने/वर्तनी में

(4) खड़े होने में

उत्तर: (3) पढने/वर्तनी में

व्याख्या: डिस्लेक्सिया (Dyslexia) एक प्रकार की अधिगम अक्षमता (Learning Disability) है। इससे पीड़ित बच्चे को शब्दों को पहचानने, धाराप्रवाह ‘पढ़ने’ और ‘वर्तनी’ (Spelling) समझने में बहुत कठिनाई होती है (जैसे वे ‘b’ को ‘d’ या ‘saw’ को ‘was’ पढ़ सकते हैं)।

  1. निम्न में से क्या समावेशी कक्षा में शिक्षक की भूमिका नहीं है ?

(1) शिक्षक को सीखने में अक्षम को अतिरिक्त समय देना चाहिए

(2) शिक्षक को निःशक्त बच्चों पर ध्यान नहीं देना चाहिए

(3) बच्चे की आवश्यकता के अनुरूप बैठने की पर्याप्त व्यवस्था करनी चाहिए

(4) शिक्षक को बच्चों को प्रोत्साहित करना चाहिए

उत्तर: (2) शिक्षक को निःशक्त बच्चों पर ध्यान नहीं देना चाहिए

व्याख्या: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का मूल उद्देश्य ही यही है कि हर प्रकार के (सामान्य और निःशक्त) बच्चे एक साथ पढ़ें। इसलिए, यह कथन बिल्कुल गलत है कि शिक्षक को निःशक्त (Disabled) बच्चों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। यह एक आदर्श शिक्षक की भूमिका नहीं हो सकती।

  1. कक्षा में छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए

(1) अनुमति नहीं देनी चाहिए

(2) प्रेरित करना चाहिए

(3) हतोत्साहित करना चाहिए

(4) रोक देना चाहिए

उत्तर: (2) प्रेरित करना चाहिए

व्याख्या: बाल-केंद्रित शिक्षा में बच्चों की जिज्ञासाओं को शांत करना बहुत ज़रूरी है। इसलिए, कक्षा में शिक्षकों को हमेशा छात्रों को प्रश्न पूछने के लिए ‘प्रेरित’ (Encourage) करना चाहिए। इससे उनके अंदर सोचने-समझने की क्षमता का विकास होता है।

  1. बच्चे की वृद्धि मुख्यतः सम्बन्धित है

(1) नैतिक विकास से

(2) सामाजिक विकास से

(3) शारीरिक विकास से

(4) भावात्मक विकास से

उत्तर: (3) शारीरिक विकास से

व्याख्या: बाल मनोविज्ञान में ‘वृद्धि’ (Growth) और ‘विकास’ (Development) दोनों अलग हैं। ‘वृद्धि’ का सीधा अर्थ है बच्चे के आकार, लंबाई, वजन और अंगों का बढ़ना, जिसे मापा जा सकता है। इसलिए वृद्धि का मुख्य संबंध केवल ‘शारीरिक विकास’ से होता है। (जबकि ‘विकास’ में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक सभी पहलू आते हैं।)

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