यूपीटीईटी 2018 solved-paper(CDP ) Shikshan Seva

UPTET 2018 Child Development and Pedagogy (CDP) Solved Paper in Hindi

UPTET 2018 बाल विकास प्रश्न और उत्तर (विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ)

प्रश्न 1 से 10:

  1. संज्ञानात्मक क्षेत्र का सही क्रम है-

(a) मूल्यांकन-अनुप्रयोग-विश्लेषण-संश्लेषण-अवबोध-ज्ञान

(b) मूल्यांकन-संश्लेषण-विश्लेषण-अनुप्रयोग-अवबोध-ज्ञान

(c) ज्ञान-अनुप्रयोग-अवबोध-विश्लेषण-संश्लेषण-मूल्यांकन

(d) ज्ञान-अवबोध-अनुप्रयोग-विश्लेषण-संश्लेषण-मूल्यांकन

उत्तर-(d) ज्ञान-अवबोध-अनुप्रयोग-विश्लेषण-संश्लेषण-मूल्यांकन

स्पष्टीकरण: यह प्रश्न बेंजामिन ब्लूम (Benjamin Bloom) के संज्ञानात्मक क्षेत्र (Cognitive Domain) के शैक्षिक उद्देश्यों के वर्गीकरण से संबंधित है। ब्लूम ने सीखने के स्तर को सरल से जटिल की ओर एक पिरामिड के रूप में बांटा है। इसका सही और तार्किक क्रम सबसे निचले स्तर से शुरू होकर ऊपर की ओर इस प्रकार जाता है: 1. ज्ञान (तथ्यों को याद रखना), 2. अवबोध या समझ (अर्थ को समझना), 3. अनुप्रयोग (सीखे हुए ज्ञान का नई स्थिति में उपयोग), 4. विश्लेषण (जानकारी को छोटे हिस्सों में बांटना), 5. संश्लेषण (हिस्सों को जोड़कर नया रूप देना), और अंत में 6. मूल्यांकन (सही-गलत का निर्णय लेना)।

  1. निम्न में से कौन-सा अच्छे शिक्षण की विशेषता नहीं है?

(a) जनतांत्रिक

(b) सहानुभूतिपूर्ण

(c) स्वेच्छाचारी

(d) वांछनीय सूचनाएं देने वाला

उत्तर-(c) स्वेच्छाचारी

स्पष्टीकरण: एक अच्छा शिक्षण हमेशा बाल-केंद्रित (Student-centered) होता है। इसमें एक जनतांत्रिक माहौल (जहां छात्रों के विचारों का सम्मान हो), शिक्षक का सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, और सही व वांछनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल होता है। इसके विपरीत, ‘स्वेच्छाचारी’ (तानाशाही या Autocratic) शिक्षण, जिसमें शिक्षक अपनी मनमर्जी चलाता है और छात्रों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं देता, एक नकारात्मक तरीका है। अतः यह अच्छे शिक्षण की विशेषता नहीं है।

  1. अभिप्रेरणा का प्रत्याशा सिद्धांत किसके द्वारा दिया गया है?

(a) मास्लो

(b) हर्जबर्ग

(c) विक्टर ब्रूम

(d) स्किनर

उत्तर-(c) विक्टर ब्रूम

 स्पष्टीकरण: अभिप्रेरणा (Motivation) का प्रत्याशा सिद्धांत (Expectancy Theory) कनाडाई मनोवैज्ञानिक विक्टर एच. वूम (Victor Vroom) द्वारा दिया गया था। यह सिद्धांत बताता है कि कोई भी व्यक्ति किसी काम को करने के लिए तब प्रेरित होता है जब उसे यह अपेक्षा (प्रत्याशा) होती है कि उसके प्रयास से एक निश्चित और सकारात्मक परिणाम निकलेगा। (मास्लो ने आवश्यकता पदानुक्रम का सिद्धांत दिया था)।

  1. अग्रिम व्यवस्थापक प्रतिमान किस परिवार से संबंधित है?

(a) सामाजिक अंतःक्रिया

(b) सूचना प्रक्रियाकरण

(c) वैयक्तिक

(d) व्यवहार परिमार्जन

उत्तर-(b) सूचना प्रक्रियाकरण

स्पष्टीकरण: ब्रूस जॉयस और मार्शा वील ने शिक्षण प्रतिमानों (Teaching Models) को अलग-अलग परिवारों में वर्गीकृत किया है। ‘अग्रिम व्यवस्थापक प्रतिमान’ (Advance Organizer Model), जिसे डेविड आसुबेल ने विकसित किया था, ‘सूचना प्रक्रियाकरण’ (Information Processing) परिवार का हिस्सा है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नया पाठ पढ़ाने से पहले कुछ ऐसी बुनियादी जानकारी (Advance organizers) देना है, जिससे वे नई सूचनाओं को अपने पुराने ज्ञान के साथ आसानी से जोड़ सकें।

  1. कौशलों के स्थानांतरण के लिए कौन-सा उपयोगी है?

(a) रेखीय अभिक्रम

(b) शाखीय अभिक्रम

(c) कौशल अंतरण एक गति है न कि उद्देश्य

(d) तैयारी और सर्जन

उत्तर-(c) कौशल अंतरण एक गति है न कि उद्देश्य

स्पष्टीकरण: सीखने की प्रक्रिया में जब कोई व्यक्ति एक स्थिति में सीखे गए कौशल या ज्ञान का उपयोग दूसरी नई स्थिति में करता है, तो उसे कौशल स्थानांतरण (Transfer of learning) कहते हैं। शिक्षण शास्त्र के अनुसार, सीखना सरल से कठिन की ओर एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसलिए, कौशल का अंतरण या स्थानांतरण एक गतिशील प्रक्रिया (गति/motion) है, जो लगातार चलती रहती है। यह कोई ठहरा हुआ या अंतिम उद्देश्य (purpose) नहीं है।

  1. निम्न में से कौन-सा शिक्षण का सूत्र नहीं है?

(a) अनिश्चित से निश्चित की ओर

(b) दृश्य से अदृश्य की ओर

(c) सरल से कठिन की ओर

(d) निगमन से आगमन की ओर

उत्तर-(d) निगमन से आगमन की ओर

स्पष्टीकरण: शिक्षण सूत्र (Maxims of teaching) वे दिशा-निर्देश हैं जो शिक्षण को आसान और प्रभावी बनाते हैं। जैसे ‘सरल से कठिन की ओर’ (पहले आसान बातें बताना), ‘दृश्य से अदृश्य की ओर’ (पहले मूर्त वस्तुएं दिखाना फिर अमूर्त की बात करना), और ‘अनिश्चित से निश्चित की ओर’। लेकिन ‘निगमन से आगमन की ओर’ कोई मानक सूत्र नहीं है। निगमन (नियम से उदाहरण) और आगमन (उदाहरण से नियम) शिक्षण की दो अलग-अलग और स्वतंत्र विधियां हैं।

  1. सूक्ष्म-शिक्षण चक्र का प्रथम पद होता है-

(a) शिक्षण

(b) योजना बनाना

(c) प्रतिपुष्टि

(d) प्रस्तावना

उत्तर-(b) योजना बनाना

स्पष्टीकरण: सूक्ष्म-शिक्षण (Micro-teaching) शिक्षकों को ट्रेनिंग देने की एक प्रभावी तकनीक है। इसका चक्र (Cycle) एक निश्चित क्रम में चलता है। इसका सबसे पहला और बुनियादी कदम ‘योजना बनाना’ (Lesson Planning) होता है। जब तक पाठ की योजना नहीं बनेगी, तब तक शिक्षण कार्य शुरू नहीं हो सकता। इसके चरण इस प्रकार हैं: योजना बनाना → शिक्षण → प्रतिपुष्टि (फीडबैक) → पुनः योजना → पुनः शिक्षण → पुनः प्रतिपुष्टि।

  1. निम्न में से कौन-सा अवबोध स्तर के शिक्षण में शामिल है?

(a) अनुप्रयोग

(b) तुलना

(c) पृथक्करण

(d) अन्वेषण

उत्तर-(d) अन्वेषण

स्पष्टीकरण: शिक्षण के तीन मुख्य स्तर होते हैं: 1. स्मृति स्तर (केवल रटना), 2. अवबोध स्तर (समझना), और 3. चिंतन स्तर (गहन विचार)। अवबोध (Understanding) स्तर में छात्रों को सिर्फ तथ्य याद नहीं कराए जाते, बल्कि उन्हें विषय की गहराई तक जाकर अवधारणाओं को समझने और ‘अन्वेषण’ (Exploration / खोज) करने के लिए प्रेरित किया जाता है ताकि वे विषयवस्तु के बीच संबंध स्थापित कर सकें।

  1. शैक्षिक सुधारों में प्रभावी विकेंद्रीकरण तभी संभव होगा-
  2. जब खंड व संकुल संदर्भ केंद्रों की भागीदारी बढ़े
  3. स्थानीय संदर्भ व्यक्ति उपलब्ध हों
  4. अध्यापकों के पास संसाधन और प्रासंगिक सामग्री भी मौजूद हो

सही उत्तर चुनें:

(a) A और B

(b) B और C

(c) A और C

(d) A, B और C

उत्तर-(d) A, B और C

स्पष्टीकरण: शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विकेंद्रीकरण (Decentralization) का मतलब है ज़िम्मेदारियों और अधिकारों को ज़मीनी स्तर तक बाँटना। यह तभी सफल हो सकता है जब: (A) ब्लॉक और क्लस्टर (संकुल) स्तर के शैक्षिक केंद्रों की सक्रिय भागीदारी हो, (B) मदद के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ या संदर्भ व्यक्ति मौजूद हों, और (C) शिक्षकों के पास पढ़ाने के लिए पर्याप्त संसाधन व सामग्री उपलब्ध हो। चूंकि ये तीनों ही शर्तें ज़रूरी हैं, इसलिए विकल्प (d) सही है।

  1. एक छात्र पढ़ रहा है, उसका नाम लेकर किसी ने बुलाया। निम्न में से किस संवेदना द्वारा वह (छात्र) अपनी अनुक्रिया प्रकट करेगा?

(a) स्पर्श संवेदना

(b) ध्वनि संवेदना

(c) दृष्टि संवेदना

(d) प्रत्यक्ष संवेदना

उत्तर-(b) ध्वनि संवेदना

स्पष्टीकरण: मनोविज्ञान और जीव विज्ञान के अनुसार, कोई भी प्रतिक्रिया (अनुक्रिया) किसी उद्दीपक (Stimulus) के मिलने पर होती है। जब कोई छात्र को उसका नाम लेकर पुकारता है, तो आवाज़ उसके कानों तक पहुँचती है। यहाँ आवाज़ एक उद्दीपक है। छात्र इस आवाज़ को कानों के माध्यम से ग्रहण करता है, जो कि एक ‘ध्वनि संवेदना’ (Auditory Sensation) है, और फिर पीछे मुड़कर या बोलकर अपनी प्रतिक्रिया देता है।

प्रश्न 11 से 20:

  1. पियाजे के सिद्धांत के अनुसार, प्राक् संक्रियात्मक अवस्था की अवधि क्या है?

(a) जन्म से दो साल

(b) दो से सात साल

(c) चार से आठ साल

(d) पांच से आठ साल

उत्तर-(b) दो से सात साल

स्पष्टीकरण: प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक जीन पियाजे (Jean Piaget) ने बच्चों के संज्ञानात्मक (बौद्धिक) विकास को चार अवस्थाओं में बांटा है:

  1. संवेदी-गामक अवस्था (जन्म से 2 वर्ष)
  2. प्राक्-संक्रियात्मक अवस्था / पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था (Pre-operational Stage): यह 2 से 7 वर्ष तक होती है। इस अवस्था में बच्चा प्रतीकों, शब्दों और चित्रों का उपयोग करना सीखता है, लेकिन उसमें तार्किक सोच की कमी होती है।
  3. मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (7 से 11 वर्ष)
  4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11 से 15 वर्ष)
  5. निम्न में से कौन-सी बाद की बाल्यावस्था के बौद्धिक विकास की विशेषता नहीं है?

(a) विज्ञान की काल्पनिक कथाओं में अधिक रुचि

(b) बढ़ती हुई तार्किक शक्ति

(c) भविष्य की योजना की सूझ-बूझ

(d) काल्पनिक भयों का अंत

उत्तर-(c) भविष्य की योजना की सूझ-बूझ

स्पष्टीकरण: उत्तर बाल्यावस्था (लगभग 6 से 12 वर्ष की आयु) में बच्चों का बौद्धिक विकास तेज़ी से होता है। उनकी तार्किक क्षमता बढ़ने लगती है, वे विज्ञान और कहानियों में रुचि लेते हैं, और उनके मन से भूत-प्रेत जैसे काल्पनिक डर खत्म होने लगते हैं। लेकिन ‘भविष्य की लंबी योजनाओं की सूझ-बूझ’ (Foresight and career planning) इतनी कम उम्र में विकसित नहीं होती; यह क्षमता मुख्य रूप से किशोरावस्था (Adolescence) की विशेषता है।

  1. इनमें से कौन मनोवैज्ञानिक भाषा विकाससे संबद्ध है?

(a) बिने

(b) चोम्स्की

(c) पॉवलव

(d) मास्लो

उत्तर-(b) चोम्स्की

स्पष्टीकरण: नोम चोम्स्की (Noam Chomsky) को आधुनिक भाषा विज्ञान का पिता माना जाता है और वे ‘भाषा विकास’ (Language Development) के क्षेत्र से प्रमुख रूप से जुड़े हुए हैं। उनका प्रसिद्ध सिद्धांत है कि मनुष्यों में भाषा सीखने की जन्मजात क्षमता होती है (Language Acquisition Device – LAD), और उन्होंने ‘सार्वभौमिक व्याकरण’ (Universal Grammar) का विचार भी दिया था।

  1. थॉर्नडाइक ने अपने सिद्धांत को किस शीर्षक से सिद्ध किया?

(a) अधिगम के प्रयास एवं भूल

(b) संकेत अधिगम

(c) संज्ञानात्मक अधिगम

(d) स्थान अधिगम

उत्तर-(a) अधिगम के प्रयास एवं भूल

स्पष्टीकरण: अमेरिकी मनोवैज्ञानिक ई.एल. थॉर्नडाइक (E.L. Thorndike) ने सीखने के अपने सिद्धांत को ‘अधिगम के प्रयास एवं भूल’ (Trial and Error Theory of Learning) का नाम दिया। उन्होंने एक भूखी बिल्ली को पिंजरे में बंद करके प्रयोग किया था। इस सिद्धांत का अर्थ है कि जब हम कोई नई चीज़ सीखते हैं, तो शुरुआत में कई गलतियां करते हैं, लेकिन बार-बार प्रयास करने से गलतियां कम होती जाती हैं और अंततः हम सही काम करना सीख जाते हैं।

  1. गिरोह अवस्था किस आयु वर्ग एवं विलंब-विकास से संबंधित है?

(a) 3-6 वर्ष एवं भाषा

(b) 8-10 वर्ष एवं समाजीकरण

(c) 16-19 वर्ष एवं नैतिकता

(d) 16-19 वर्ष एवं संज्ञानात्मक

उत्तर-(b) 8-10 वर्ष एवं समाजीकरण

स्पष्टीकरण: शिक्षा मनोविज्ञान में ‘गिरोह अवस्था’ (Gang Age) का संबंध उत्तर बाल्यावस्था से है, जो मुख्य रूप से 8 से 10 वर्ष की उम्र के बीच होती है। इस उम्र में बच्चे अपने माता-पिता से ज्यादा अपने दोस्तों के समूह (Peer group) को अहमियत देते हैं। वे समूह के नियमों को मानते हैं और साथ मिलकर खेलते हैं। इस सामूहिक प्रवृत्ति के कारण उनमें ‘समाजीकरण’ (Socialization) का विकास बहुत तेज़ी से होता है।

  1. पियाजे के अनुसार, संज्ञानात्मक विकास की तृतीय अवस्था निम्न में से कौन-सी है?

(a) पूर्व-संक्रिया अवस्था

(b) मूर्त संक्रिया अवस्था

(c) औपचारिक संक्रिया अवस्था

(d) संवेदात्मक गामक अवस्था

उत्तर-(b) मूर्त संक्रिया अवस्था

स्पष्टीकरण: जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत की चार अवस्थाओं का क्रम इस प्रकार है:

  1. संवेदी-गामक अवस्था
  2. पूर्व-संक्रिया अवस्था
  3. मूर्त संक्रिया अवस्था (Concrete Operational Stage) – यह तीसरी अवस्था है (लगभग 7 से 11 वर्ष)। इसमें बच्चे सामने रखी (मूर्त) वस्तुओं के आधार पर तार्किक रूप से सोचना शुरू कर देते हैं।
  4. औपचारिक संक्रिया अवस्था।
  5. निम्न में से अधिगम में योगदान देने वाले मनोवैज्ञानिक कारकों में कौन-सा शामिल नहीं है?

(a) प्रेरणा

(b) रुचि

(c) अधिगम की इच्छा

(d) विषय-वस्तु का स्वरूप

उत्तर-(d) विषय-वस्तु का स्वरूप

स्पष्टीकरण: सीखने (अधिगम) को प्रभावित करने वाले कारकों को दो भागों में बांटा जा सकता है: मनोवैज्ञानिक कारक (जो सीधे छात्र के मन और भावनाओं से जुड़े हों) और बाहरी कारक। छात्र की प्रेरणा (Motivation), उसकी रुचि (Interest), और सीखने की इच्छा—ये सभी उसके आंतरिक ‘मनोवैज्ञानिक कारक’ हैं। जबकि ‘विषय-वस्तु का स्वरूप’ (पाठ कितना कठिन या सरल है) एक बाहरी शैक्षिक/पाठ्यक्रम संबंधी कारक है।

  1. निम्न में से सामाजिक मूल्य कौन-सा है?

(a) प्राथमिक लक्ष्य

(b) मूल प्रवृत्ति

(c) सहायतापरक व्यवहार

(d) आक्रामकत्ता की आवश्यकता

उत्तर-(c) सहायतापरक व्यवहार

स्पष्टीकरण: सामाजिक मूल्य (Social Values) वे सकारात्मक आदर्श और व्यवहार हैं जो समाज में लोगों को एक साथ मिलकर रहने में मदद करते हैं। एक-दूसरे की मदद करना, दान देना, दया दिखाना—यानी ‘सहायतापरक व्यवहार’ (Altruistic behaviour) एक बहुत बड़ा सामाजिक मूल्य है। जबकि मूल प्रवृत्तियां (Instincts) और आक्रामकता इंसान के जन्मजात और व्यक्तिगत गुण होते हैं, सामाजिक मूल्य नहीं।

  1. पश्च अन्वेषण तथा साधन-साक्ष्य विश्लेषण निम्न में से किसके उदाहरण हैं?

(a) एल्गोरिदम

(b) मानसिक वृत्ति

(c) स्वतः शोध

(d) प्रकार्यात्मक स्थिरता

उत्तर-(c) स्वतः शोध

 

स्पष्टीकरण: समस्या-समाधान की प्रक्रिया में, ‘पश्च अन्वेषण’ (लक्ष्य से पीछे की ओर काम करना) और ‘साधन-साध्य विश्लेषण’ (Means-ends analysis – लक्ष्य तक पहुँचने के लिए बीच के रास्तों का विश्लेषण करना) ‘स्वतः शोध’ (Heuristics विधि) के उदाहरण हैं। इस विधि में व्यक्ति रटे-रटाए नियमों (जैसे गणित के फॉर्मूले/एल्गोरिदम) पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बुद्धि, अनुभव और अनुमान का प्रयोग करके समस्या का समाधान खुद खोजता है।

  1. सीखने के वक्र अभ्यास द्वारा सीखने की मात्रा, गति और प्रगति की सीमा को ग्राफ पर प्रदर्शित करते हैं!” यह किसने कहा है?

(a) रॉस

(b) एबिंगहास

(c) स्किनर

(d) एम.एल. बिग्गी

उत्तर-(*)स्पष्टीकरण: यह प्रश्न परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा विवादित (तारांकित *) माना गया था। यद्यपि मनोवैज्ञानिक हरमन एबिंगहास (Ebbinghaus) ने सीखने और भूलने के वक्र (Learning curve) पर सबसे पहले प्रयोग किए थे, लेकिन प्रश्न में जो सटीक परिभाषा या वाक्य दिया गया है, वह किसी भी प्रामाणिक पुस्तक में एबिंगहास या अन्य विकल्पों के नाम से ज्यों का त्यों नहीं मिलता है। इसी तकनीकी त्रुटि के कारण इस प्रश्न पर सभी को समान अंक दिए गए होंगे।

प्रश्न 21 से 30:

  1. निम्न में से कौन-सा थॉर्नडाइक के अधिगम के प्राथमिक नियमों में शामिल नहीं है?

(a) अभ्यास का नियम

(b) प्रभाव का नियम

(c) साहचर्यात्मक स्थानांतरण का नियम

(d) तत्परता का नियम

उत्तर-(c) साहचर्यात्मक स्थानांतरण का नियम

स्पष्टीकरण: ई.एल. थॉर्नडाइक ने सीखने के कुल 8 नियम दिए हैं, जिनमें 3 मुख्य/प्राथमिक (Primary) नियम हैं और 5 गौण (Secondary) नियम हैं। 3 प्राथमिक नियम हैं: 1. अभ्यास का नियम, 2. प्रभाव का नियम, और 3. तत्परता का नियम। विकल्प (c) ‘साहचर्यात्मक स्थानांतरण का नियम’ (Law of Associative Shifting) प्राथमिक नियम नहीं है, बल्कि यह उनके द्वारा दिए गए पाँच गौण नियमों में से एक है।

  1. अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत किसके अनुकूलन पर बल देता है?

(a) व्यवहार

(b) चिंतन

(c) तर्क

(d) अभिप्रेरणा

उत्तर-(a) व्यवहार

स्पष्टीकरण: ‘अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत’ (Classical Conditioning) इवान पी. पॉवलव (Ivan P. Pavlov) ने दिया था। उन्होंने कुत्ते की लार टपकने का प्रयोग करके दिखाया कि कैसे एक प्राणी किसी अस्वाभाविक उद्दीपक (जैसे घंटी की आवाज़) के साथ अपना संबंध जोड़कर प्रतिक्रिया देना सीख जाता है। यह पूरा सिद्धांत व्यक्ति या प्राणी के बाहरी ‘व्यवहार’ (Behavior) को बदलने या अनुकूलित करने पर केंद्रित है। इसमें चिंतन या तर्क का कोई स्थान नहीं होता।

  1. क्रिया-प्रसूत अनुबंधन का दूसरा नाम है-

(a) नैमित्तिक अनुबंधन

(b) प्राचीन अनुबंधन

(c) समीपस्थ अनुबंधन

(d) चिह्न अनुबंधन

उत्तर-(a) नैमित्तिक अनुबंधन

स्पष्टीकरण: बी.एफ. स्किनर (B.F. Skinner) के ‘क्रिया-प्रसूत अनुबंधन’ (Operant Conditioning) सिद्धांत को ‘नैमित्तिक अनुबंधन’ (Instrumental Conditioning) भी कहा जाता है। इसका कारण यह है कि इस सिद्धांत में प्राणी का अपना व्यवहार (क्रिया) किसी परिणाम (पुरस्कार या दंड) को प्राप्त करने का ‘निमित्त’ या साधन (Instrument) बनता है।

  1. निम्न में से कौन-सी अधिगम की एक विशेषता नहीं है?

(a) अधिगम व्यवहार में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन है

(b) अधिगम प्राणी की अभिवृद्धि है

(c) अधिगम का अवलोकन प्रत्यक्ष रूप से किया जा सकता है

(d) अधिगम एक लक्ष्योन्मुख प्रक्रिया है

उत्तर-(c) अधिगम का अवलोकन प्रत्यक्ष रूप से किया जा सकता है

स्पष्टीकरण: सीखना (अधिगम) एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे व्यक्ति के व्यवहार में बदलाव आता है और वह लक्ष्य की ओर बढ़ता है। लेकिन सीखने की मानसिक प्रक्रिया हमारे दिमाग के अंदर चलती है, जिसे हम सीधे तौर पर अपनी आँखों से नहीं देख सकते। हम केवल सीखने के बाद व्यक्ति के व्यवहार में जो परिवर्तन आता है, उसे देख सकते हैं। अतः “अधिगम का अवलोकन प्रत्यक्ष रूप से (Direct observation) किया जा सकता है”, यह कथन गलत है और सीखने की विशेषता नहीं है।

  1. कोहलर यह सिद्ध करना चाहता था कि सीखना-

(a) स्वायत्त यादृच्छिक क्रिया है।

(b) संज्ञानात्मक संकार्य है।

(c) एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति, पशु से श्रेष्ठ है।

(d) परिस्थिति के विभिन्न अंगों का प्रत्यक्षीकरण है।

उत्तर-(b) संज्ञानात्मक संकार्य है।

स्पष्टीकरण: वोल्फगैंग कोहलर (Wolfgang Köhler) ने ‘सूझ या अंतर्दृष्टि का सिद्धांत’ दिया था। उन्होंने सुल्तान नामक चिंपैंजी पर प्रयोग करके यह साबित किया कि सीखना कोई अंधा प्रयास या रटने की प्रक्रिया नहीं है। सीखना एक ‘संज्ञानात्मक संकार्य’ (Cognitive Operation) है, जिसका अर्थ है कि प्राणी स्थिति को समझने के लिए अपनी बुद्धि, ज्ञान और मानसिक शक्तियों का उपयोग करता है और अचानक समस्या का हल (सूझ) निकाल लेता है।

  1. किसी भी नई भाषा को सीखने के लिए कहां से प्रारंभ किया जाना चाहिए?

(a) वाक्यों के निर्माण से

(b) शब्दों के निर्माण से

(c) अक्षरों व शब्दों के मध्य साहचर्य से

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर-(c) अक्षरों व शब्दों के मध्य साहचर्य से

स्पष्टीकरण: कोई भी नई भाषा सीखते समय सीधा वाक्य या शब्द नहीं बनाए जा सकते। सबसे पहले उस भाषा के अक्षरों (वर्णमाला) का ज्ञान होना ज़रूरी है। उसके बाद अक्षरों को जोड़कर शब्द बनाना सीखा जाता है। यानी, सीखने की शुरुआत ‘अक्षरों और शब्दों के बीच साहचर्य’ (Association) या संबंध स्थापित करने से ही होनी चाहिए।

  1. समावेशी कक्षा में किस प्रकार का/के छात्र शामिल होता/होते हैं?

(a) सामान्य और विशिष्ट छात्र

(b) केवल सामान्य छात्र

(c) केवल विशिष्ट छात्र

(d) बहुभाषी और प्रतिभाशाली छात्र

उत्तर-(a) सामान्य और विशिष्ट छात्र

स्पष्टीकरण: समावेशी शिक्षा (Inclusive Education) का अर्थ है बिना किसी भेदभाव के सभी बच्चों को एक ही कक्षा में पढ़ाना। इसलिए, एक समावेशी कक्षा में ‘सामान्य छात्र’ (औसत बच्चे) और ‘विशिष्ट छात्र’ (जैसे शारीरिक रूप से अक्षम, कमज़ोर, या बहुत मेधावी बच्चे) सभी एक साथ बैठते हैं और समान शिक्षा प्राप्त करते हैं।

  1. अधोलिखित में गणित-संबंधी अधिगम अक्षमता को कौन-सा पद परिभाषित करता है?

(a) पठन दोष

(b) गणना दोष

(c) नीरसता संबंधी दोष

(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर-(b) गणना दोष

स्पष्टीकरण: सीखने की अक्षमताओं (Learning Disabilities) के अलग-अलग नाम हैं। जिस बच्चे को गणित के सवालों को समझने, अंकों को पहचानने या जोड़-घटाव (गणितीय संक्रियाओं) में गंभीर समस्या होती है, उसे ‘डिस्कैलकुलिया’ (Dyscalculia) की समस्या होती है। इसे हिंदी में ‘गणना दोष’ कहा जाता है। (जबकि पढ़ने की समस्या को ‘पठन दोष’ या डिस्लेक्सिया कहते हैं)।

  1. समावेशीकरण की सफलता के लिए आवश्यक है-

(a) अभिभावकों की भागीदारी का न होना

(b) अलगाव

(c) क्षमता निर्माण का अभाव

(d) संवेदनशीलता

उत्तर-(d)  संवेदनशीलता

स्पष्टीकरण: समावेशी शिक्षा तभी सफल हो सकती है जब समाज, शिक्षक और अन्य छात्र विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के प्रति जागरूक और ‘संवेदनशील’ (Sensitive) हों। संवेदनशीलता का अर्थ है उनकी परेशानियों को समझना और उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखना। अलगाव (अलग करना) या अभिभावकों को दूर रखना समावेशीकरण के बिल्कुल खिलाफ हैं।

  1. निम्न में से कौन-सा संवेग का तत्व नहीं है?

(a) दैहिक

(b) संज्ञानात्मक

(c) व्यवहारात्मक

(d) संवेदी

उत्तर-(d) संवेदी

 स्पष्टीकरण: मनोविज्ञान में संवेग (Emotion – जैसे गुस्सा, डर, खुशी) के तीन प्रमुख तत्व माने गए हैं: 1. शारीरिक/दैहिक (Physiological – जैसे डर में दिल की धड़कन बढ़ना), 2. संज्ञानात्मक (Cognitive – स्थिति को समझना या सोचना), और 3. व्यवहारात्मक (Behavioral – चेहरे के भाव या भाग जाना)। कोई बाहरी ‘संवेदी’ (Sensory) इनपुट संवेग को ट्रिगर तो कर सकता है (जैसे कानों से कुछ सुनना या आँखों से कुछ भयानक देखना), लेकिन संवेदना अपने आप में संवेग का कोई तत्व (Element) नहीं है।

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